इन्द्र-चन्द्रादि-सदृशास्
त्रि-नेत्राश् चतुर्-आननाः
चतुर्-भुजाः सहस्रास्याः
केचिद् अष्ट-भुजास् तथा
अनुवाद
कुछ इंद्र, चंद्र या अन्य देवताओं जैसे दिखते थे। कुछ की तीन आँखें थीं, या चार सिर, या चार भुजाएँ, या आठ—या हज़ार मुख थे।
Some resembled Indra, Chandra, or other gods. Some had three eyes, or four heads, or four arms, or eight—or a thousand—faces.
तात्पर्य
कुछ वैकुण्ठ निवासी स्वर्ग के राजा, इन्द्र, की तरह दिखे, जिनके शरीर पर एक हजार आँखें थीं और हाथों में वज्र थे। अन्य चंद्रमा, सूर्य, अग्नि और वायु जैसे देवताओं की तरह प्रकट हुए। इन्द्र के नेतृत्व में ये देवता वास्तव में भगवान शिव और ब्रह्मा की तरह सर्वोच्च भगवान के अवतार नहीं हैं, जिन्हें विशेष रूप से गुना-अवतार के रूप में सशक्त किया गया है। भगवान नारायण की सेवा के लिए आवश्यक होने पर, वैकुंठ-वासी सामान्य देवताओं के सटीक रूपों को ग्रहण कर सकते हैं; लेकिन नारायण के सशक्त अवतार और प्रत्यक्ष विस्तार, जैसे अनंत शेष, वैकुण्ठ-वासी केवल उनकी शारीरिक विशेषताओं को कॉपी करके ही अनुकरण कर सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥