श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 250
 
 
श्लोक  2.4.250 
श्री-गोप-कुमार उवाच
श्रुत्वा तन् नितरां हृष्टो
मुहुः श्री-नारदं नमन्
तस्याशीर्-वादम् आदाय
शिक्षां चानुस्मरन्न् अयाम्
 
 
अनुवाद
श्रीगोपकुमार बोले: यह सुनकर मैं अत्यन्त प्रसन्न हुआ और श्रीनारदजी को बारम्बार प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लिया और उनकी आज्ञाओं का स्मरण करते हुए चल पड़ा।
 
Shri Gopakumar said: I was very happy to hear this and after saluting Shri Naradji again and again, I took his blessings and started walking remembering his orders.
तात्पर्य
अयोध्या के लिए प्रस्थान करने के बाद, गोपा-कुमार ने नारद के आदेशानुसार भगवान रामचंद्र की महिमा का स्मरण किया, और इस प्रकार वे जप करते थे: 'हे सीता के पति, रघुनाथ, लक्ष्मण के बड़े भाई! हे भगवन, श्री हनुमान के प्रिय स्वामी!' (पाठ 243)
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)