श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 247
 
 
श्लोक  2.4.247 
वैकुण्ठस्यैव देशास् ते
कोशला-द्वारकादयः
तत् तत्र गमनायाज्ञा
तद्-भर्तुर् न ह्य् अपेक्ष्यताम्
 
 
अनुवाद
अयोध्या, द्वारका तथा अन्य धाम सभी वैकुंठ के ही क्षेत्र हैं। अतः वहाँ जाने के लिए तुम्हें वैकुंठ के स्वामी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
 
Ayodhya, Dwaraka, and other holy places are all regions of Vaikuntha. Therefore, you do not need to seek permission from the Lord of Vaikuntha to go there.
तात्पर्य
कोशल (अयोध्या), द्वारका व अन्य श्रेष्ठ धाम जैसे कि भगवान जगन्नाथ का पुरुषोत्तम-क्षेत्र, सभी वैकुण्ठ के विशाल राज्य से संबंधित हैं। चूंकि गोप कुमार का वैकुण्ठ के बाहर जाने की योजना नहीं है, इसलिए उन्हें भगवान नारायण से विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)