श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 244
 
 
श्लोक  2.4.244 
येन प्रकारेण निजेष्ट-देवो
लभ्येत तस्यानुसृतिः कृतित्वम्
यत्रास्य गन्धो ’पि भवेत् क्रियेत
प्रीतिः परा तत्र तद्-एक-निष्ठैः
 
 
अनुवाद
व्यक्ति को अपने आराध्य देव को प्राप्त करने के लिए जो भी मार्ग अपनाना चाहिए, वही सबसे बुद्धिमानी भरा कार्य है। जो व्यक्ति अपनी आराध्य के प्रति अनन्य रूप से समर्पित है, उसे ऐसी किसी भी चीज़ की ओर अत्यधिक आकर्षित होना चाहिए जिसमें उसे अपने आराध्य की उपस्थिति की हल्की सी भी सुगंध मिले।
 
Whatever path one takes to attain their deity is the wisest course of action. A person who is completely devoted to their deity should be deeply attracted to anything that carries even the slightest trace of their deity's presence.
तात्पर्य
गोप-कुमार भगवान रामचंद्र से मिलने में संकोच कर सकते हैं। आखिरकार, श्री मदन-गोपालदेव ने बहुत पहले ही गोप-कुमार का हृदय चुरा लिया है, और तब से गोप-कुमार ने हर किसी और हर चीज़ में रुचि खो दी है। तो अब उनसे यह कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वह किसी और के लिए प्रेम विकसित करें? नारद इस संभावित संदेह को दूर करते हैं और उन्हें आश्वस्त करते हैं कि भगवान रामचंद्र से मिलना सबसे बुद्धिमानी वाला काम है जो वह अपने स्वार्थ के लिए कर सकते हैं। उन्हें इस तर्क का पालन करना चाहिए: स्व-कार्यं उद्धरेत् प्राज्ञः/ कार्य-ध्वंसेन मूर्खता: "एक बुद्धिमान व्यक्ति को किसी तरह ज़रूरी काम करना चाहिए। जो काम को बिगाड़ता है, वह मूर्ख है।" इसलिए गोप-कुमार को पहले अयोध्या और फिर द्वारका जाकर, चरणों में अपने आराध्य भगवान से मिलकर अपने गंतव्य तक चरणों में पहुँचना चाहिए। गोप-कुमार भगवान श्री रघुनाथ के रूप में सर्वोच्च भगवान की विशेष कृपा से भगवान गोपालदेव को प्राप्त करेंगे, जैसे उन्होंने भगवान शिव की विशेष कृपा से भगवान विष्णु को प्राप्त किया। लेकिन क्या यह केवल एक देवता की पूजा करने की गोप-कुमार की पवित्र प्रतिज्ञा का उल्लंघन नहीं करेगा? नहीं, क्योंकि अपने इष्ट-देव के प्रति विशिष्ट भक्ति में स्थिर एक भक्त स्वचालित रूप से उस ओर आकर्षित हो जाएगा जिसमें उसके स्वामी की उपस्थिति की ज़रा सी भी सुगंध हो। नारद को विश्वास है कि भगवान रामचंद्र से मिलना गोप-कुमार को सुख की पूर्णता तक ले जाएगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)