फिर भी, भगवान के अवतारों के सेवक अपनी-अपनी मनोवृत्ति के अनुसार, अपनी-अपनी प्रिय प्रेममयी सेवाओं में परम सुख प्राप्त करते हैं।
Nevertheless, the servants of the incarnations of the Lord, according to their respective attitudes, attain supreme happiness in their respective beloved loving services.
तात्पर्य
चूँकि श्री कृष्णदेव सभी अत्युत्तम गौरवों के असीम सागर हैं, इसलिए हर भक्त उनकी और केवल उनकी ही सेवा सर्वोच्च संभव सुख प्राप्त करने के लिए क्यों नहीं करता? उत्तर यह है कि प्रत्येक वैष्णव, चाहे वह विष्णु के किसी भी रूप की पूजा करे, एक विशेष व्यक्तिगत सुख प्राप्त करता है, जो उसके अपने दृष्टिकोण के अनुसार बिल्कुल अनुकूल होता है, और यह उसके हृदय की इच्छाओं को पूरी तरह से पूरा करता है। सर्वोच्च प्रभु के सभी पवित्र सेवक इस तरह की परिपूर्ण संतुष्टि को जानते हैं, इसलिए वे सभी अपने रस में उपलब्ध सुख की अंतिम सीमा प्राप्त करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥