गत्वा गत्वा निवर्तन्ते
चन्द्र-सूर्यादयो ग्रहाः
अद्यापि न निवर्तन्ते
द्वादश अक्षर चिन्तकाः
“चन्द्र, सूर्य और अन्य ग्रह भी बारंबार बनते और नष्ट होते हैं। किन्तु जो व्यक्ति द्वादश अक्षर वाले मंत्र का ध्यान करते हैं उन्हें आज तक भी वापस नहीं लौटना पड़ा है।”
चूँकि भगवान नारायण के सभी मंत्र उनके पवित्र नामों का आवाहन करते हैं, इसलिये यहाँ उल्लिखित द्वादश अक्षर वाले मंत्र से परोक्ष रूप से भगवान के सभी मंत्रों का ही इशारा किया गया है, सिर्फ़ द्वादश अक्षर वाले मंत्र का ही नहीं, वैकुण्ठ को प्राप्त करने के असरदार साधन के रूप में। जो भक्त भगवान की किसी भी मंत्र से पूरे दिल से पूजा करते हैं वे अपने अगले जन्म में उनके आश्रय को प्राप्त करते हैं। और जो भक्तों को आश्रय दिया जाता है, उनमें से जो भक्त भगवान को सर्वोच्च नियंत्रक के रूप में पूजते हैं, वे वैकुण्ठ में उन तक पहुँचते हैं।
