श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  2.4.134 
शोकं सर्वं विहायेमं
श्रीमद्-वैकुण्ठ-नायकम्
निजेष्ट-देव-बुद्ध्यैव
वीक्षस्व भज मा भिदाम्
 
 
अनुवाद
इस सारे विलाप को एक तरफ रख दो और वैकुंठ के दिव्य स्वामी को उसी प्रभु के रूप में देखो जिसे तुम पूजते हो। उन्हें दो अलग-अलग व्यक्ति मत समझो।
 
Put all this lamentation aside and see the Divine Lord of Vaikuntha as the same Lord you worship. Don't think of Him as two separate Persons.
तात्पर्य
गोपा-कुमार तो मात्र इतना ही समझ लेने पर कि भगवान नारायण ही उनके प्राण-प्रिय मदन गोपाल है, मन में शान्ति पाएगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)