यह स्पष्टीकरण श्री नंदीश्वर द्वारा दिया गया है, लेकिन अधिक सटीक रूप से भगवान शिव हमेशा एक ही रूप में होते हैं, इस अर्थ में कि उनका शरीर हमेशा विशुद्ध रूप से आध्यात्मिक, सच्चिदानंद होता है, और कभी परिवर्तन के अधीन नहीं होता। वह हमेशा अपने निवास स्थान में उपस्थित रहते हैं, भौतिक सृष्टि से परे, और इसलिए अपने भक्तों के आनंद के लिए उस निवास स्थान में हमेशा दृष्टिगोचर रहते हैं।
