श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.3.63 
सुखं तद्-गण-मध्ये ’हं
प्रविष्टः प्रीणितो ’खिलैः
शैवैः श्री-नन्दिनो ’श्रौषं
वृत्तम् एतद् विलक्षणम्
 
 
अनुवाद
मैं प्रसन्नतापूर्वक भगवान शिव के साथियों के बीच गया और उनके सभी भक्तों ने मेरा स्नेहपूर्वक स्वागत किया। श्रीनंदीश्वर से मैंने ये अनोखे तथ्य सुने:
 
I happily entered among Lord Shiva's companions and was warmly welcomed by all his devotees. From Sri Nandiswara, I heard these remarkable facts:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)