जगाद च निजं सर्वम्
इदं प्रेष्ठाय ते ’ददाम्
सर्वम् एतत्-प्रभावेण
स्वयं ज्ञास्यसि लप्स्यसे
अनुवाद
फिर उन्होंने कहा, "चूँकि तुम मुझे बहुत प्रिय हो, इसलिए मैंने तुम्हें अपना सब कुछ दे दिया है। इस मंत्र की शक्ति से तुम स्वयं ही सब कुछ समझ जाओगे और प्राप्त कर लोगे।"
Then he said, "Since you are very dear to me, I have given you everything I have. By the power of this mantra you will understand and attain everything yourself."
तात्पर्य
हमें इस बात पर संदेह नहीं करना चाहिए कि गुरु, केवल कुछ शब्दों और संकेतों से, गोपा-कुमार को वह सब कुछ सिखा सकते हैं जो जानना था। यद्यपि सच्चा अध्यात्मिक ज्ञान केवल जानकारी एकत्र करके प्राप्त नहीं किया जा सकता है, इसे अध्यात्मिक गुरु की कृपा से प्राप्त किया जा सकता है, जो स्वाभाविक रूप से हृदय में पारलौकिक ज्ञान को जागृत करता है। जैसा कि गुरु यहाँ संकेत देते हैं, गोपा-कुमार मंत्र की शक्ति से सब कुछ समझ जाएँगे-न केवल वही जो उन्होंने अभी सीखा है बल्कि वे चीजें भी जो अभी सीखनी बाकी हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥