श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.3.56 
स स-हासम् अवोचन् मां
गोपालोपासना-पर
गोप-बाल न जानीषे
श्री-शिवं जगद्-ईश्वरम्
 
 
अनुवाद
नन्दीश्वर ने हँसते हुए मुझसे कहा, "हे गोपाल के अनन्य उपासक ग्वालबाल, क्या तुम ब्रह्माण्ड के स्वामी भगवान शिव को नहीं पहचानते?
 
Nandishvara laughingly said to me, “O cowherd boy, exclusive devotee of Gopala, do you not recognize Lord Shiva, the Lord of the universe?
तात्पर्य
नंदीश्वर को यह हास्यास्पद लगा कि भगवान गोपाल के भक्त भगवान शिव की पहचान से अनजान हो सकते हैं। लेकिन क्योंकि गोपा-कुमार एक साधारण ग्वाला था, नंदीश्वर ने सोचा, "वह बहुत कम जानकारी वाला हो सकता है।" भगवान शिव को ब्रह्मांड का स्वामी कहकर, नंदीश्वर ने चतुराई से गोपा-कुमार को बताया कि क्योंकि भगवान शिव स्वतंत्र हैं, इसलिए वे बिना किसी दोष के सुसंस्कृत व्यवहार के नियमों का कथित रूप से उल्लंघन कर सकते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)