हर्ष-वेगाद् उपव्रज्य
श्रीमन्-नन्दीश्वराह्वयम्
अपृच्छं तद्-गणाध्यक्षं
तद्-वृत्तान्तं विशेषतः
अनुवाद
मैं प्रसन्नता से प्रेरित होकर उनके साथियों के नेता श्री नन्दीश्वर के पास गया और उनसे इस व्यक्ति के विषय में तथा उसके कार्यों के बारे में विस्तार से पूछा।
Inspired by joy, I went to the leader of his companions, Shri Nandishwar, and asked him in detail about this person and his work.
तात्पर्य
श्री शिव से अनजान गोपा-कुमार ने श्री नंदीश्वर से पूछा, "यह कौन हैं? उनका निवास कहाँ है? वे अभी कहाँ जा रहे हैं?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥