जगद्-विलक्षणैश्वर्यो
मुक्त-वर्गाधिको ’पि सन्
लक्ष्यते ’ति-सद्-आचारो
महा-विषयवान् इव
अनुवाद
"वह भौतिक जगत में किसी से भी अधिक शक्तिशाली, सभी मुक्त आत्माओं से अधिक श्रेष्ठ प्रतीत होता है, फिर भी वह एक महान इन्द्रिय-तृप्तिकर्ता की तरह सभ्य आचरण के नियमों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है।"
"He appears to be more powerful than anyone in the material world, more superior than all liberated souls, yet he seems to violate the rules of civilized conduct like a great sense-gratifier."
तात्पर्य
गोपा-कुमार को यह बात विचित्र लगी कि यद्यपि यह अद्वितीय व्यक्ति भौतिक जगत का सर्वोच्च शासक और धार्मिक सिद्धांतों की रक्षा करने वाला प्रतीत होता था, पर वह उचित आचरण के नियमों की उपेक्षा कर रहा था - नग्न होकर घूमना, सार्वजनिक रूप से अपनी पत्नी से आलिंगनबद्ध होना, इत्यादि - सभी प्रकार के इंद्रिय तृप्ति का आनंद लेते हुए, जबकि वह एक पूर्ण रूप से मुक्त ट्रान्सडेंटलिस्ट प्रतीत होता था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥