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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)
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श्लोक 52
श्लोक
2.3.52
परमं विस्मयं प्राप्तो
हर्षं चैतद् अचिन्तयम्
को न्व् अयं पारिवाराढ्यो
भाति मुक्ति-पदोपरि
अनुवाद
अत्यंत आश्चर्य और प्रसन्नता का अनुभव करते हुए मैंने सोचा, "यह कौन है, जो इतने बड़े दल के साथ मुक्ति के धाम से ऊपर प्रकट हुआ है?"
Feeling extremely surprised and delighted, I thought, “Who is this, who has appeared above the abode of salvation with such a large group?”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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