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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)
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श्लोक 49
श्लोक
2.3.49
हृष्टो ’हं परितः पश्यन्
वृषारूढं व्यलोकयम्
कम् अप्य् ऊर्ध्व-पदात् तत्रा-
यान्तं सर्व-विलक्षणम्
अनुवाद
उत्साहित होकर, चारों ओर देखते हुए, मैंने देखा कि कोई व्यक्ति बैल पर सवार था - एक अनोखा व्यक्ति, जो किसी उच्च क्षेत्र से आ रहा था।
Excited, looking around, I saw someone riding a bull – a unique person, coming from some higher realm.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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