श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.3.28 
भक्तिम् इच्छसि वा विष्णोस्
तथाप्य् एतस्य चेटिकाम्
भगिनीं शक्ति-रूपां मां
कृपया भज भक्ति-दाम्
 
 
अनुवाद
“अथवा यदि तुम विष्णु की भक्ति चाहते हो, तो भी तुम्हें दयालु होना चाहिए और भक्ति प्रदान करने वाली मेरी पूजा करनी चाहिए, क्योंकि मैं उनकी दासी, उनकी बहन और उनकी शक्ति का अवतार हूँ।”
 
“Or even if you desire devotion to Vishnu, you should be kind and worship me, the bestower of devotion, because I am his maidservant, his sister, and the incarnation of his power.”
तात्पर्य
शुद्ध वैष्णव मुक्ति की परवाह नहीं करते, फिर भी वे दूसरे कारणों से प्रकृति का सम्मान करते हैं। वह प्रभु विष्णु की विनम्र सेवक और बहन है, यशोदा के गर्भ से सुभद्रा के रूप में जन्मी है, और वह भगवान विष्णु के भक्तों को भक्ति सेवा में प्रगति करने में मदद करती है। हालाँकि माया भगवान विष्णु की आंतरिक ऊर्जा (अंतरंग-शक्ति) के समान नहीं है, लेकिन वह उस ऊर्जा का विस्तार है, जो बाहरी तत्वों में समाया हुआ है। इस प्रकार वह मूल ऊर्जा से भिन्न नहीं है, जैसे किसी व्यक्ति की छाया व्यक्ति से भिन्न नहीं होती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)