यच्च व्रजन्त्यनमीषां ऋषभानुवृत्त्या
दूरे यमा हि उपरि नः स्पृहणीय-शीलाः
भर्तुः मिथः सु-यशसः कथनानुराग-
वैक्ल्व्य-बाष्प-कलया पुलकी-कृतंगाः
"वे लोग जिनके शारीरिक लक्षण परमानंद में बदल जाते हैं, जिनकी सांसे फूलने लगती हैं और प्रभु के गुणों का वर्णन सुनते ही पसीना छूटने लगता है, इन्हें परमेश्वर के राज्य में स्थान प्राप्त होता है, भले ही वे ध्यान या अन्य तपस्या की परवाह न करें। परमेश्वर का राज्य भौतिक ब्रह्मांडों से परे है और मेरी और अन्य देवताओं द्वारा इसकी कामना की जाती है।"
