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श्लोक 2.3.145  |
तयाशु तादृशी प्रेम-
सम्पद् उत्पादयिष्यते
यया सुखं ते भविता
वैकुण्ठे कृष्ण-दर्शनम् |
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| अनुवाद |
| उस भक्ति सेवा से तुम्हें शीघ्र ही प्रेम के खजाने का एहसास हो जाएगा और तुम वैकुंठ में कृष्ण को आसानी से देख सकोगे। |
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| By that devotional service you will soon realize the treasure of love and you will easily see Krishna in Vaikuntha. |
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