भगवान कृष्ण की कृपा से, उनके भक्तजन इस भक्ति को अनेक रूपों में आनंदपूर्वक अनुभव करते हैं। यह उनके हृदयों में प्रकट होती है, जो भौतिक गुणों से मुक्त होकर शाश्वतता, ज्ञान और आनंद में लीन रहते हैं।
By the grace of Lord Krishna, his devotees joyfully experience this devotion in many forms. It manifests in the hearts of those who, free from material qualities, are absorbed in eternity, knowledge, and bliss.
तात्पर्य
यदि भक्तिमय सेवा केवल आध्यात्मिक ज्ञानेंद्रियों से ही की जा सकती है, तो फिर बद्ध जीवात्मा कभी भी इसमें संलग्न होने के योग्य कैसे बन सकते हैं? कृष्ण की अकारण दया से ही वे इतने शुद्ध हो सकते हैं कि वे भगवान की महिमा का अलौकिक श्रवण और गान प्रारंभ कर सकें। जैसे-जैसे भक्त अपनी साधना में परिपक्व होते जाते हैं, उनके व्यक्तिगत रुझान धीरे-धीरे प्रकट होते जाते हैं और उन्नति के उच्चतर स्तरों पर कृष्ण के साथ उनकी पारस्परिक बातचीत और अधिक सटीक, विविध और आनंदमय हो जाती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥