श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.3.122 
गौडे गङ्गा-तटे जातो
माथुर-ब्राह्मणोत्तमः
जयन्त-नामा कृष्णस्या-
वतारस् ते महान् गुरुः
 
 
अनुवाद
गंगा तट पर स्थित गौड़ देश में जयंत नामक एक उच्च कोटि के मथुरा ब्राह्मण का जन्म हुआ। वे कृष्ण के अवतार हैं और आपके परम गुरु हैं।
 
In Gauda country, on the banks of the Ganges, a high-ranking Mathura Brahmin named Jayanta was born. He is an incarnation of Krishna and your supreme guru.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)