श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  2.3.116 
श्री-भगवत्-पार्षदा ऊचुः
तेन वैकुण्ठ-नाथेन
समं को ’पि न विद्यते
भगवन् भवतो भेदो
गौर्याश् च रमया सह
 
 
अनुवाद
भगवान के पार्षदों ने कहा: हे शिवजी, आपमें और वैकुण्ठ के स्वामी भगवान में, तथा गौरी और राम में कोई अंतर नहीं है।
 
The Lord's attendants said: O Lord Shiva, there is no difference between you and the Lord of Vaikuntha, and between Gauri and Rama.
तात्पर्य
जिस प्रकार भगवान शिव भगवान वैकुण्ठ-नाथ के अवतार हैं, उसी प्रकार देवी गौरी माता सीता (लक्ष्मी) का पर्याय अवतार हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)