श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  2.1.92 
निजेष्ट-देवता-भ्रान्त्या
गोपालेति महा-मुदा
समाह्वयन् प्रणामाय
पपात भुवि दण्ड-वत्
 
 
अनुवाद
इस व्यक्ति को अपना पूज्य देवता समझकर ब्राह्मण ने प्रसन्नतापूर्वक पुकारा, “हे गोपाल!” और दंड की भाँति भूमि पर गिरकर प्रणाम किया।
 
Considering this person to be his revered deity, the Brahmin joyfully called out, “O Gopala!” and fell on the ground like a staff and bowed down.
तात्पर्य
क्योंकि ब्राह्मण के सामने बैठा हुआ ग्वाला मदन गोपाल की तरह ही सजा-धजा था इसलिए ब्राह्मण ने सोचा कि यह स्वयं ही भगवान हैं। ब्राह्मण उनका सम्मान करना चाहता था इसलिए वह तुरंत ज़मीन पर लेट गया और उत्साह के मारे जोर से बोला "हे गोपाल!" इन तीन शब्दों को बोलकर वह भगवान का सम्मान कर रहा था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)