श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  2.1.91 
तत्र नीप-निकुञ्जान्तर्
गोप-वेश-परिच्छदम्
किशोरं सु-कुमाराङ्गं
सुन्दरं तम् उदैक्षत
 
 
अनुवाद
वहाँ कदम्ब वृक्षों के एक समूह में उन्हें एक सुन्दर युवक मिला जिसका शरीर अत्यन्त कोमल था, तथा जिसने ग्वाले के समान वस्त्र और साज-सज्जा धारण की हुई थी।
 
There, in a group of Kadamba trees, he found a handsome young man with a very soft body, dressed and adorned like a cowherd.
तात्पर्य
जिस व्यक्ति को ब्राह्मण ने पाया, वह एक ग्वाले के लड़के की तरह कपड़े पहने था, जिसके हाथ में बाँसुरी, भैंस का सींग, लाठी और सिर पर मोर का पंख लगा था। उसके शरीर का हर हिस्सा शुभ दिखाई दे रहा था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)