गंगा शत-गुणा प्रोक्ता
माथुरे मम मण्डले
यमुना विश्रुता देवी
नात्र कार्यया विचारणा
तस्याः शत-गुणा प्रोक्ता
यत्र केशी निपाटितः
केश्याः शत-गुणा प्रोक्ता
यत्र विश्रमितो हरिः
"हे पृथ्वी देवी, मेरा निवास मथुरा मेरी अपनी भूमि है, जहाँ यमुना गंगा से सौ गुना ज्यादा पवित्र है। इस पर किसी को संदेह करने की ज़रूरत नहीं। मथुरा से सौ गुना ज्यादा पवित्र यमुना का वह स्थान है जहाँ केशी राक्षस गिरा था, और केशी-तीर्थ से सौ गुना ज्यादा पवित्र वह पास की जगह है जहाँ राक्षस के मारे जाने के बाद कृष्ण ने विश्राम किया था।"
