श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  2.1.86 
ततः स प्रातर् उत्थाय
हृष्टः सन् प्रस्थितः क्रमात्
श्रीमन्-मधु-पुरीं प्राप्तः
स्नातो विश्रान्ति-तीर्थके
 
 
अनुवाद
इस प्रकार ब्राह्मण प्रातःकाल उठकर प्रसन्नतापूर्वक अपनी यात्रा पर चल पड़ा। धीरे-धीरे वह धन्य मधुपुरी पहुँचा और विश्रांति तीर्थ में स्नान किया।
 
Thus, the Brahmin woke up in the morning and happily set off on his journey. Slowly, he reached the blessed Madhupuri and bathed in the Vishranti Tirtha.
तात्पर्य
भगवान के आदेश का पालन करते हुए, ब्राह्मण तुरंत वृंदावन के लिए प्रस्थान कर गया। और जब वह पवित्र धाम में पहुँचा, तो वह पहले मथुरा नगर आया। तीर्थयात्रियों की मानक प्रथा का पालन करते हुए, वह पहले यमुना पर विश्रांति-तीर्थ (विश्राम-घाट) के नाम से जाने वाले स्नान स्थल पर गया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)