श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.1.84 
विप्र विश्वेश्वरस्यानु-
स्मर वाक्यम् उमा-पतेः
यमुना-तीर-मार्गेण
तच् छ्री-वृन्दावनं व्रज
 
 
अनुवाद
"हे ब्राह्मण, कृपया उमा के पति विश्वेश्वर के वचनों का स्मरण करो। यमुना के किनारे वाले मार्ग से श्रीवृन्दावन जाओ।
 
"O Brahmin, please remember the words of Vishveshvara, the husband of Uma. Go to Sri Vrindavan by the path along the Yamuna.
तात्पर्य
विश्वेश्वर भगवान के निर्देश ब्राह्मण को याद दिलाते हुए, भगवान गोपाल ने इसे अपने मुख से और अपने ही शब्दों में दोहराया, इस तरह इसे अपना सीधा आज्ञा पत्र भी बनाया। इसके अलावा, विश्वेश्वर (भगवान शिव) देवी कामख्या के पति हैं, जो आध्यात्मिक प्राधिकारी हैं जिन्होंने ब्राह्मण को उनका मंत्र दिया था, इसलिए ब्राह्मण को निर्देश की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)