श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  2.1.83 
एकदा तु तथैवासौ
शोचन्न् अकृत-भोजनः
निद्राणो माधवेनेदं
समादिष्टः स-सान्त्वनम्
 
 
अनुवाद
एक दिन, इस प्रकार विलाप करते हुए, जब वह उपवास के कारण निद्रालु होने लगा, तो उसने भगवान माधव को देखा, जिन्होंने उसे सांत्वना दी और उसे यह उपदेश दिया:
 
One day, while lamenting thus, as he began to feel drowsy due to fasting, he saw Lord Madhava, who consoled him and gave him this advice:
तात्पर्य
फिर ब्राह्मण एक बार फिर बेहोशी की हालत में चला गया और होश में आने के बाद स्वयं को लेकर बहुत परेशान हुआ। इस बार उसने इतना निराश महसूस किया कि उसने भोजन किए बिना ही दिन का समापन कर लिया, जिससे उसे नींद आ गई। ज़बकि दशाश्वमेध-तीर्थ के देवता भगवान माधव इस नींद सी हालत में उसे दिखाई दिए और उन्होंने कुछ इस तरह से बात की: "तुम बिना किसी कारण के इसलिए विलाप क्यों कर रहे हो? और तुम अपने पूजनीय देवता मुझे इसलिए कष्ट क्यों दे रहे हो? मैं आपको विश्वास दिलता हूँ कि जल्द ही तुम्हारी सारी महत्वाकांक्षाएं पूरी होंगी।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)