श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.1.82 
किं निद्राभिभवो ’यं मे
किं भूताभिभवो ’थ वा
अहो मद्-दुःस्वभावो यच्
छोक-स्थाने ’पि हृत्-सुखम्
 
 
अनुवाद
"क्या मैं सो गया हूँ? या मुझ पर किसी भूत का साया पड़ गया है? ओह, मैं इतना दुष्ट हूँ कि जब मेरे पास दुखी होने का कोई कारण भी होता है, तब भी मैं अपने दिल में खुशी महसूस करता हूँ!"
 
"Have I fallen asleep? Or am I possessed by some ghost? Oh, I am so wicked that even when I have reason to be sad, I still feel joy in my heart!"
तात्पर्य
समस्या के कारण के बारे में अपने ही सवाल का जवाब देने की कोशिश करते हुए, ब्राह्मण ने अनुमान लगाया कि वह शायद सो गया होगा। लेकिन चूँकि वह थका हुआ महसूस नहीं करता था, उसने फिर से अनुमान लगाया कि कुछ और हुआ होगा, जैसे किसी भूत ने हमला किया हो।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)