देव्याः प्रभावाद् आनन्दम्
अस्याप्य् आराधने लभे
तन् न जह्यां कदाप्य् एनम्
एतन्-मन्त्र-जपं न च
अनुवाद
"देवी की शक्ति से मुझे उनकी पूजा करने में आनंद की अनुभूति हुई है। इसलिए मैं उन्हें या उनके मंत्र का जाप कभी नहीं छोड़ूँगा।"
"The power of the Goddess has given me the joy of worshipping Her. Therefore, I will never give up chanting Her or Her mantra."
तात्पर्य
वैष्णव यह तो मानते हैं कि परमेश्वर से भिन्न रूपों में भक्ति करने पर आनंद मिल सकता है, पर ब्राह्मण इस बात को नकारता है, वह कहता है कि देवी कामख्या की शक्ति से ही भक्ति में आनंद की अनुभूति होती है। क्योंकि उन्हें देवी ने यही मंत्र पढ़ने को कहा है और यही मंत्र पढ़ने में उन्हें आनंद आता है। इसलिए वह इसे कैसे छोड़ सकते हैं?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥