तं दृष्ट्वा गरूडारूढं
प्रत्यग्र-जलद-छविम्
चतुर्बाहुं विशालाक्षं
सर्वांलंकारभूषितम्
"उन्हें गरुड़ पर विराजमान भगवान नजर आए। भगवान की आभा नए बादल की तरह थी। उनके चार हाथ और बड़ी-बड़ी आंखें थीं और वे सभी तरह के आभूषण पहने हुए थे।"
ब्रह्मादयाः सुराः सर्वे
योगिनः सनकादयः
त्वां साक्षात्-कर्तुमिच्छंति
सिद्धाश्च कपिलादयः
"ब्रह्मा के नेतृत्व में सभी देवता, सनका के नेतृत्व में सभी योगी और कपिल के नेतृत्व में सभी सिद्ध पुरुष आपको साक्षात देखना चाहते हैं।"
वर्तमान कविता कहती है कि ब्राह्मण ने माघ-माहात्म्यादौ, "माघ-माहात्म्य और अन्य ग्रंथों" से सुना। उन अन्य ग्रंथों में श्री स्कंद पुराण का वह भाग शामिल हो सकता है जो प्रयाग-तीर्थ का महिमामंडन करता है।
