श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  2.1.73 
शङ्ख-चक्र-गदा-पद्म-
विभूषित-चतुर्-भुजः
न मद्-देवस् ततः कस्मात्
प्रतीयेत स माधवः
 
 
अनुवाद
"भगवान माधव की चार भुजाएँ हैं," उसने सोचा, "और वे शंख, चक्र, गदा और कमल से सुशोभित हैं। यह मेरा विग्रह नहीं है। मेरे भगवान ऐसे क्यों दिखते हैं?"
 
"Lord Madhava has four arms," ​​he thought, "and is adorned with a conch, a disc, a mace, and a lotus. This is not my Deity. Why does my Lord look like this?"
तात्पर्य
पाँचरात्र में भगवान माधव के रूप का वर्णन नारायण के चौबीस व्युह विस्तारों के अंतर्गत किया गया है। गदा-शंख-चक्र-पद्मान बिभ्रन् माधव उच्यते: "जब भगवान अपने दाहिने हाथ में क्रमशः, दिशा में, गदा, शंख, चक्र और कमल धारण किए हुए होते हैं, तो उन्हें माधव कहा जाता है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)