श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.1.62 
भगवन्तम् इमे विष्णुं
नित्यं वयम् उपास्महे
गुरोर् गृहीत-दीक्षाका
यथा-मन्त्रं यथा-विधि
 
 
अनुवाद
अपने गुरुओं द्वारा दीक्षित होकर हम सदैव उनके द्वारा दिए गए मंत्रों और विधियों से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।
 
Having been initiated by our gurus, we always worship Lord Vishnu with the mantras and methods given by them.
तात्पर्य
संगीत भक्तों और प्राचीन नगर ब्राह्मणों के बीच का अंतर यह था कि उन्होंने अधिकृत आचार्यों से वैष्णव दीक्षा प्राप्त की हुई थी और वे अपने आध्यात्मिक गुरुओं के निर्देशों के अनुसार भक्ति सेवा का अभ्यास कर रहे थे। क्योंकि ब्राह्मण में एक शुद्ध भक्त की दया की कमी थी, इसलिए गोपाल-मंत्र के उनके उच्चारण में विकसित फल की बजाय अविकसित परिणाम ही मिलते थे। वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान उससे दूर हो गया था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)