तच् छ्रुत्वोपहसन्ति स्म
केचित् तं केचिद् अब्रुवन्
रे मूढ तूष्णीं तिष्ठेति
के ’प्य् ऊचुर् दीन-वत्सलाः
अनुवाद
कुछ वैष्णव यह सुनकर हँस पड़े। कुछ ने उससे कहा, "अरे मूर्ख, चुप हो जा!" कुछ और, जो पतित आत्माओं पर दया करते थे, उससे कुछ और ही कहने लगे।
Some Vaishnavas laughed at this. Some said, "You fool, shut up!" Others, who had compassion for fallen souls, said something else.
तात्पर्य
संगकीर्तन उत्सव में भाग लेने वाले कुछ लोगों जो भक्तिमय सेवा के लिए नए थे, ब्राह्मण का उपहास करने लगे: "ओह, तुम संतो में श्रेष्ठ हो, सबसे अधिक विद्वान हो! हाँ, तुम सही हो, हम सब अपने होश खो रहे हैं, और यह शोर सार्वजनिक उपद्रव है।" समूह में मौजूद कुछ मध्यवर्ती साधक इनकी टिप्पणियों से क्रोधित थे। अन्य लोगों ने, जो सभा में पूर्ण रूप से आत्म-साक्षात्कार प्राप्त भक्त थे, उन्होंने उनके प्रति वही करुणा दिखाई जो वे सभी जीवित प्राणियों के लिए महसूस करते थे। उन लोगों की सच्चे दोस्तों की तरह, उन्होंने स्पष्ट रूप से उन्हें बताया कि उन्हें क्या सुनने की जरूरत है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥