सो ’बुधो विस्मयं प्राप्तो
वैष्णवान् पृच्छति स्म तान्
हे गायका वन्दिनो रे
दण्ड-वत् पातिनो भुवि
अनुवाद
भोले, अज्ञानी और आश्चर्यचकित होकर उन्होंने उन वैष्णवों से कहा, "हे गायकों, हे प्रार्थना करने वालों, और तुम जो छड़ों की तरह जमीन पर गिर रहे हो, मुझे क्षमा करें।
Naive, ignorant and astonished, he said to those Vaishnavas, “O singers, O praying ones, and you who are falling on the ground like sticks, please forgive me.
तात्पर्य
पहले कभी ऐसे व्यवहार को ना देखने या इसके बारे में ना सुनने की वजह से ब्राह्मण समझ नहीं पाया कि क्या सोचे। उसे वैष्णवों के शिष्टाचार का ज्ञान नहीं था और वह वैष्णवों की पहचान साधारण मंच कलाकारों और दरबारी पाठकों से नहीं कर पाया। इसलिए उसने अनजाने में संकीर्तन को बीच में रोका और वैष्णवों से बेअदबी से बात की। वह सिर्फ उनके बाहरी व्यवहार को ही देख पाया लेकिन उनकी अंतर्निहित आत्मिक अवस्था को नहीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥