परन्तु बादरायणी तो कृष्ण-भक्ति के रस का सागर है, और उनकी कृपा से मैं परीक्षित और उत्तरा के पास बैठा और उनकी बातचीत प्रत्यक्ष सुनी।
But Badarayani is an ocean of the essence of Krishna-bhakti, and by her grace I sat near Parikshit and Uttara and heard their conversation live.
तात्पर्य
यदि जैमिनी के अनुसार कृष्ण और उनकी भक्ति मन और शब्द से परे हैं तो जैमिनी स्वयं श्री बृहद-भागवतामृत के पहले भाग को बोलने में कैसे समर्थ हुए? जैमिनी का उत्तर है कि बादरायण के पुत्र शुकदेव गोस्वामी ने उन्हें सशक्त किया था। जैमिनी वैदिक ज्ञान के कई विभागों के विशेषज्ञ थे और परम सत्य का उन्हें गहन ज्ञान था। पर वे केवल इन योग्यताओं के बल पर कृष्ण की महिमा को समझने और उसका वर्णन करने में असमर्थ थे; बल्कि उन्हें परम वैष्णव शुकदेव के अनुग्रह से सशक्त किया गया था। यह जानते हुए कि परिक्षित और उनकी माँ के बीच की बातचीत को दोहराने के लिए जैमिनी एकमात्र उपयुक्त व्यक्ति हैं, शुकदेव ने जैमिनी के लिए ऐसी जगह बैठने की व्यवस्था की जहां वह उनके बगल में होंगे ताकि वह भागवतामृत सुन सकें। चूंकि जैमिनी ने इसे सुना था और शुकदेव गोस्वामी द्वारा उन्हें इसे ठीक से समझने के लिए सशक्त किया गया था, इसलिए इस पुस्तक में अपने पाठकों का गंभीर ध्यान खींचने की क्षमता है। और श्रेष्ठ भक्तों की कृपा से प्रेषित होने के कारण श्री बृहद-भागवतामृत को प्रामाणिक प्रकट शास्त्र के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥