श्री-जैमिनिर् उवाच
नैतत् स्व-शक्तितो राजन्
वक्तुं ज्ञातुं च शक्यते
सर्व-ज्ञानां च दुर्ज्ञेयं
ब्रह्मानुभविनाम् अपि
अनुवाद
श्री जैमिनी ने कहा: हे राजन! इन विषयों को अपने बल से समझना या कहना असम्भव है। यहाँ तक कि परम सत्य को प्रत्यक्ष जानने वाले सर्वज्ञ ऋषियों के लिए भी इन्हें समझना कठिन है।
Sri Jaimini said: O King, these matters are impossible to understand or explain on our own. Even the omniscient sages who have direct knowledge of the ultimate truth find them difficult to understand.
तात्पर्य
कृष्ण की शुद्ध भक्ति के विज्ञान का सार स्पष्ट करने के लिए शब्दों की शक्ति अपर्याप्त है और मन भी उसे समझने में असमर्थ है। यहाँ तक कि वे रहस्यवादी भी जो भूत, वर्तमान और भविष्य को देख सकते हैं, और वे मुक्त आत्माएँ भी जिनके मस्तिष्क पारलौकिक वास्तविकता को देखने के लिए समायोजित हैं, श्रीमद् भागवतम के अमृत सागर में प्रकट गोलोक की महिमा को समझने में विफल रहते हैं। निराकार ब्रह्म की आध्यात्मिक वास्तविकता से कहीं अधिक श्रेष्ठ ईश्वर और उसके भक्तों की अंतिम वास्तविकता साझा की गई है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥