सुभद्रा द्रौपदी कुन्ती
विराट-तnaya तथैव,
गांधारी धृतराष्ट्रश्च
युयुत्सुर गौतमो यमौ,
वृकोदरश्च धौम्यश्च
स्त्रियो मत्स्य-सुतादयः
न शेहिरे विमुह्यन्तो
विरहं शार्ङ्ग-धन्वनः
"सुभद्रा, द्रौपदी, कुन्ती, उत्तरा और गांधारी, और धृतराष्ट्र, युयुत्सु, कृपाचार्य, और नकुल और सहदेव, और भीमसेन और धौम्य, और मत्स्य की बेटी जैसी महिलाएं सभी लगभग बेहोश हो गईं क्योंकि उनके लिए भगवान कृष्ण से अलग होना असंभव था।"
उत्तर के पिता, राजा विराट को उनकी बहन सत्यवती के साथ एक मछुआरे (मत्स्य) ने गोद लिया था। चूंकि विराट को मत्स्य भी कहा जाता था, इसलिए मत्स्य-सुता ("मछुआरे की बेटी") नाम या तो सत्यवती या उसकी भतीजी उत्तरा को इंगित कर सकता है। अगर हम इन दोनों विकल्पों में से दूसरा लेते हैं, तो उत्तरा का इन दो छंदों में दो बार उल्लेख किया गया है, जो दर्शाता है कि वह दूसरों की तुलना में भी अधिक तीव्रता से कृष्ण को विरह से तड़पती थी। इसलिए उनके लिए कृष्ण की भक्ति सेवा के बारे में इतने गोपनीय रूप से पूछना बिल्कुल उचित है। तवैव योग्यः प्रश्नः का अर्थ है "केवल प्रासंगिक प्रश्न तुम्हारा है (तव एव)।" ऐसे प्रश्न पूछने के लिए कुछ अन्य व्यक्तियों में उचित भक्ति भाव होगा।
