उन भक्तों में विविध और असंख्य श्रेष्ठताएँ प्रवाहित होती हैं, जैसे नदियाँ सागर में प्रवाहित होती हैं।
Diverse and innumerable excellences flow into those devotees, just as rivers flow into the ocean.
तात्पर्य
गोकुल के भक्तजनों में सभी प्रकार की पूर्णताओं का पूर्ण रूप से प्रकटीकरण हुआ है। वे भक्तजन पूर्ण रूप से सुंदर, आकर्षक और कृपालु हैं, और वे धार्मिक कर्तव्यों, आर्थिक विकास, इंद्रियतृप्ति, त्याग, ज्ञान, अनुभूति, भक्ति और भगवान के प्रति पवित्र प्रेम की मूल्यवान संपत्ति से संपन्न हैं। ये सभी पूर्णताएं उनके भीतर परिमित जीवों के लिए संभव अधिकतम डिग्री तक मौजूद हैं। जब भी श्री ब्रहद- भागवतमृत गोकुल के निवासियों से कम भक्तों की महिमा को दर्शाता है, तो इसका उद्देश्य गोकुल-वासियों के अधिक महान गौरव को उजागर करना है और यह प्रदर्शित करना है कि सभी प्रकार की उत्कृष्टताएं अंततः गोकुल के निवासियों में बहती हैं, जैसे कि सभी नदियों का पानी अंततः समुद्र में बहता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥