श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 215
 
 
श्लोक  2.1.215 
शोक-दुःखातुरं रात्रौ
शयानं मां महा-प्रभुः
इदम् आज्ञापयाम् आस
पर-दुःखेन कातरः
 
 
अनुवाद
उस रात जब मैं दुःख और पीड़ा से व्याकुल होकर बिस्तर पर लेटा हुआ था, तो भगवान जगन्नाथ, जो दूसरों के दुःख से दुःखी होते हैं, ने मुझे निम्नलिखित आदेश दिया।
 
That night, as I lay in bed, distraught with grief and pain, Lord Jagannatha, who is grieved by the suffering of others, gave me the following instruction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)