श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 214
 
 
श्लोक  2.1.214 
एवं संवत्सरे जाते
मया तत्रैकदा श्रुतम्
मथुरायाः प्रायातेभ्यो
’त्रत्य-वृत्तं विशेषतः
 
 
अनुवाद
इस प्रकार एक वर्ष बीत गया और फिर एक दिन मैंने मथुरा से आये हुए आगंतुकों से मथुरा के बारे में विस्तृत समाचार सुना।
 
In this way a year passed and then one day I heard detailed news about Mathura from visitors who had come from Mathura.
तात्पर्य
गोप-कुमार ने इन यात्रियों से गायों, ग्वालों, पक्षियों, वृक्षों, जंगली जानवरों और श्री वृंदावन और गोवर्धन जैसे क्षेत्रों के निवासियों की महिमा के बारे में सुना।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)