श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  2.1.200 
पृथिव्याः साधवः सर्वे
मिलिता यत्र वर्गशः
प्रेम्णोन्मत्ता इवेक्ष्यन्ते
नृत्य-गीतादि-तत्पराः
 
 
अनुवाद
इन उत्सवों में दुनिया भर से साधु-संत समूहों में एकत्रित होते थे। नृत्य, गायन आदि में लीन, वे ईश्वर-प्रेम में पागल से प्रतीत होते थे।
 
At these festivals, saints and sages from all over the world gathered in groups. Engrossed in dancing and singing, they appeared to be mad with love for God.
तात्पर्य
पुरुषोत्तम-क्षेत्र आने वाले साधु कई अलग-अलग सम्प्रदायों के थे, लेकिन वे सभी खुशी से अपने संकीर्तन समूहों में, भगवान जगन्नाथ के त्योहारों के लिए एकत्रित होते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)