फिर पुरी के राजा का निधन हो गया और उनके सबसे बड़े पुत्र ने, जो बहुत त्यागी था, राज्य स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
Then the king of Puri died and his eldest son, who was a great renunciate, refused to accept the kingdom.
तात्पर्य
गोपा-कुमार के गुरु ने वचन दिया था कि इस मंत्र से गोपा-कुमार की सभी इच्छाएँ पूरी होंगी, और अब उनकी पहली इच्छा पूरी होने जा रही थी। 197 से 202 तक के छंद बताते हैं कि कैसे गोपा-कुमार पुरी के राजा बने और भगवान जगन्नाथ की निकट सेवा में प्रवेश करने में सक्षम हुए। युवराज ने सिंहासन को अस्वीकार कर दिया क्योंकि वह केवल भगवान जगन्नाथ के कमल-मुख का दर्शन लेना जारी रखना चाहता था; वह राजा को दी जाने वाली विशेषाधिकार प्राप्त सेवाओं को भी नहीं चाहता था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥