या यथा भुवि वर्तन्ते पुर्यो भगवतः प्रियाः
तास तथा सन्ति वैकुण्ठे तत्तल्-लीलार्थमादृताः
"इस पृथ्वी पर कई पवित्र नगर भगवान को प्रिय हैं, और वे सभी वैकुंठ में भी मौजूद हैं, जहाँ उन्हें भगवान के विभिन्न लीलाओं में उनके महत्व के लिए पूजा जाता है।"
मां उत्तर सत्ताईस लाख वैकुण्ठ के मुक्त भक्तों के पांचों प्रकार वैष्णवों-ज्ञान-भक्त, शुद्ध-भक्त, प्रेम-भक्त, प्रेम-पर-भक्त और प्रेमातुरा-भक्त का प्रतिनिधित्व करती हुई बोल रही हैं। हालाँकि, वास्तव में, वह बहुत अधिक विश्वास के बिना बोलती है, क्योंकि जहाँ तक उसकी समझ है, वैकुंठ के भक्त ऐसी श्रेणियों में विभाजित नहीं हैं।
