श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 183-184
 
 
श्लोक  2.1.183-184 
यश् चक्रवर्ती तत्रत्यः
स प्रभोर् मुख्य-सेवकः
श्री-मुखं वीक्षितुं क्षेत्रे
यदा याति महोत्सवे

सज्-जनोपद्रवोद्यान-
भङ्गादौ वारिते ’प्य् अथ
मादृशो ’किञ्चनाः स्वैरं
प्रभुं द्रष्टुं न शक्नुयुः
 
 
अनुवाद
विशेष पर्वों पर, प्रभु के प्रधान सेवक, उस देश के पराक्रमी राजा, प्रभु के दिव्य स्वरूप के दर्शन हेतु पवित्र नगरी में आते थे। प्रतिष्ठित लोगों को होने वाली परेशानियों और प्रभु के बगीचों को नुकसान पहुँचाने जैसी समस्याओं से बचने के लिए, मुझ जैसे महत्वहीन लोगों को प्रभु के दर्शन करने की अनुमति नहीं थी।
 
On special festivals, the Lord's chief servant, the mighty king of that land, would come to the holy city to see the Lord's divine form. To avoid troubles for dignitaries and damage to the Lord's gardens, unimportant people like me were not allowed to see the Lord.
तात्पर्य
भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा से, उस समय पुरी का राजा एक चक्रवर्ती था, जो अन्य कई राजाओं का अधिपति था। अपने शाही पद के विशेषाधिकार के कारण वह आधिकारिक तौर पर भगवान का प्रमुख उपासक था। उसकी राजधानी कहीं और थी, पर रथ-यात्रा जैसे प्रमुख त्यौहारों के लिए वह श्री जगन्नाथ पुरी आया करता था। उन अवसरों पर, गोपा-कुमार जैसे आम लोग, जिनके पास न तो कोई ओहदा था और न ही कोई अनुचर, भगवान के दर्शन करने स्वतंत्र रूप से आने से प्रतिबंधित रहते थे। संत-भक्त राजा के इस निषेध में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था, क्योंकि भगवान की संपत्ति और सेवा की रक्षा करना आवश्यक था। यदि राजा के उपस्थित रहने के दौरान सभी को मंदिर में जाने दिया जाता तो उसे और उसके साथ आए सम्मानित लोगों को दर्शन करने में कठिनाई होती और भगवान के फूल के बगीचे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं या उनके तालाब अनुशासनहीन भीड़ द्वारा प्रदूषित किए जा सकते हैं। कम से कम, यदि बहुत सारे लोगों को मंदिर के पास आने दिया जाता तो भगवान की गोपनीयता को खतरा रहता।

इसलिए शहर के गरीब लोगों को अपनी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगने को सहन करना पड़ता था, और उनके साथ-साथ उन्हें राजा की विशाल सेना की उपस्थिति के कारण भी परेशानी का सामना करना पड़ता था, जिसमें हाथी, रथ, घुड़सवार और पैदल सैनिक होते थे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)