भगवान जगन्नाथ के दर्शन की इच्छा से अभिभूत होकर मैंने क्षण भर में ही सब कुछ त्याग दिया और भगवान जगन्नाथ की महिमा का गान करते हुए उड़ीसा की ओर चल पड़ा।
Overwhelmed by the desire to have darshan of Lord Jagannath, I left everything in a moment and started towards Orissa singing the glories of Lord Jagannath.
तात्पर्य
गोकुलकुमार, भगवान जगन्नाथ और उनके क्षेत्र की महिमा से इतने प्रेरित हो चुके थे कि उन्होंने राज्य और उससे जुड़ी सभी बाहरी और अंदरुनी आसक्तियों को त्याग दिया। वो एकदम से ही जगन्नाथ पुरी की यात्रा शुरू कर दी, जो की ओरिशिया की दिशा में था। रास्ते में, वो भगवान जगन्नाथ के नाम के चारों अक्षर ''ज-ग-न-नाथ'' का लगातार मंत्रोच्चारण कर रहे थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥