श्रवणाड्यैर उपायर यः
कथंचिद द्र्यते महाः
नीलाद्री-शिखरे भाति
सर्व-चाक्षुष-गोचरः
तम एव परमात्मानं
ये प्रपश्यंति मानवाः
ते यांति भवनं विष्णोः
किं पुनर ये भवदृशाः
"भगवान की महिमा, जो श्रवण जैसी विधियों द्वारा आंशिक रूप से देखी जाती है, खुले तौर पर नीले पर्वत की चोटी पर दिखाई देती है। कोई भी मनुष्य जो उस परम भगवान को देखता है, वह विष्णु के निवास पर जाएगा, आपके जैसे महान आत्मा की बात क्या करें।" जैसे ही गोप-कुमार ने अपने आगंतुकों से पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा के बारे में सुना और अधिक, उनके दिल में आश्चर्य पैदा हो गया कि उन्होंने पहले कभी ऐसी महिमा के बारे में नहीं सुना। हालाँकि गोप-कुमार की पूजा करने वाले भगवान का रूप ईश्वर का वही व्यक्तित्व था, परमेश्वर श्री जगन्नाथ भगवान के सभी ऐसे अवतारों की उत्पत्ति हैं। सभी अवतारों के स्रोत को देखने से, विशेष रूप से पुरुषोत्तम-क्षेत्र जैसे असाधारण स्थान पर, एक मात्र अवतार को देखने से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
गांगा के तट पर भगवान विष्णु की पूजा करने वाले गोप-कुमार ने भगवान के बारे में इस तरह के तथ्य कभी नहीं सुने थे, न ही उन्होंने भगवान की पूजा करने के लिए दृढ़ लगाव विकसित किया था। यह उनके दिव्य आध्यात्मिक गुरु और भगवान के दिव्य व्यक्तित्व का संयुक्त प्रभाव था जिसे इस वर्णन में बाद में और अधिक स्पष्ट रूप से समझाया जाएगा। हम देखेंगे कि गोप-कुमार के गुरु और गोप-कुमार के पूज्य भगवान लगातार उनके कदम-दर-कदम आध्यात्मिक प्रगति पर अपना प्रभाव कैसे डालते हैं।
