स्वयं च क्वचिद् आसक्तिम्
अकृत्वा पूर्व-वद् वसन्
जपं निर्वाहयन् भुञ्जे
प्रसादान्नं प्रभोः परम्
अनुवाद
और राजसी वैभव से सदा अनासक्त होकर, मैं पहले जैसा ही जीवन जीता रहा। मैं चुपचाप अपना मंत्र जपता रहा और भगवान की कृपा से बचा हुआ भोजन ही खाता रहा।
And, always unattached to royal splendor, I continued to live my life as before. I silently chanted my mantra and, by God's grace, ate leftover food.
तात्पर्य
गोप-कुमार के मंत्र ने उन्हें शाही शक्ति से दूषित होने से बचाया। इसलिए वह संप्रभुता और धन से विचलित नहीं हुए। अपने सरल स्वभाव को बनाए रखते हुए, वह अपने मंत्र का जाप करते रहे, भगवान विष्णु के प्रसाद का सम्मान करने से जो संतुष्टि उनके इंद्रियों को प्राप्त होती थी, उससे संतुष्ट होकर।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥