श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  2.1.151 
अथापुत्रः स राजा मां
वैदेशिकम् अपि प्रियात्
सु-शीलं वीक्ष्य पुत्रत्वे
परिकल्प्याचिरान् मृतः
 
 
अनुवाद
उस देश का राजा पुत्रहीन था। और मेरे विदेशी होने के बावजूद, उसने मेरे अच्छे चरित्र को देखा और मुझसे स्नेह करने लगा। लेकिन मुझे अपना पुत्र बनाने के कुछ ही समय बाद, उसकी मृत्यु हो गई।
 
The king of that country was childless. Despite my being a foreigner, he saw my good character and grew fond of me. But shortly after adopting me as his son, he died.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)