षड्भिर् मासोपवासैस्तु
यत् फलं परिकीर्तितम्
विष्णोर्नैवेद्य-सिथान्नं
भुंजतां तत् कलियुगे
"छह महीने उपवास करने के व्रत से प्राप्त सभी लाभ कलियुग में उन लोगों द्वारा प्राप्त किए जाते हैं जो भगवान विष्णु को चढ़ाया हुआ उबला हुआ चावल खाते हैं।"
हालाँकि, इन सभी निर्देशों से, गोपा-कुमार को पूर्ण, व्यवस्थित आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त नहीं हुई। उदाहरण के लिए, किसी ने उन्हें मूल बातों के बारे में नहीं बताया, जैसे कि उच्च ग्रहों का अस्तित्व, जैसे कि भगवान इंद्र का स्वर्ग। वैष्णव इस बात से अनजान थे कि गोपा-कुमार, अपने संत गुणों के बावजूद, किसी प्रकार का कोई प्रशिक्षण कभी नहीं मिला था। इस प्रकार उन्होंने भौतिक जगत की जटिलताओं के बारे में भोले ही रहे।
