श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  2.1.130 
किं इमं यजसि स्वामिन्न्
इति पृष्टो मया हसन्
सो ’वदत् किं न जानासि
बालायं जगद्-ईश्वरः
 
 
अनुवाद
मैंने उससे पूछा, “गुरुजी, आप किसकी पूजा कर रहे हैं?” हँसते हुए उसने उत्तर दिया, “प्रिय बालक, क्या तुम नहीं जानते कि यह ब्रह्मांड का स्वामी है?”
 
I asked him, “Guruji, whom are you worshipping?” Laughing, he replied, “Dear child, don’t you know that this is the Lord of the Universe?”
तात्पर्य
उपासक को आश्चर्य था कि कोई भी, यहाँ तक कि एक बच्चा भी, यह नहीं जानता कि श्री शालिगराम विराट पुरुष भगवान का साक्षात् स्वरूप हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)